“Mark Your Calendar: Unveiling Teej 2023 Date & Celebrations – Akha Teej, Hariyali Teej, and Hartalika Teej Await! 📅🌸”

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1.साल 2023 में हरियाली तीज किस तारीख को है 

हैलो फ्रेंड स्वागत है आपका आपके apne blog happy wishes images .com है।- Akha Teej, Hariyali Teej, and Hartalika Teej हरियाली तीज का पर्व हर साल श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागन बिना हैं खंड सौभाग्य की उपवास कर शिव गौरी का पूजन करती है। इस दिन महिलाएं 16 श्रृंगार के अलावा हरी चूड़ियां व हरे रंग के वस्त्र धारण करती है। ज्योतिष अनुसार इस साल हरियाली तीज पर कई शुभ योग बनने से इस दिन का महत्त्व कहीं अधिक होगा। आइए जानते हैं साल 2023 में हरियाली तीज किस तारीख को है पूजा का शुभ हो रहा है पूजा विधि नियम और इस दिन बन रहे शुभ हो क्या?

2.हरियाली तीज महत्व और शुभ मुहूर्त

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाने वाली हरियाली तीज सुहागिनों का महापर्व है। इस दिन विवाहित स्त्रियां निर्जला व्रत रखती हैं, और भगवान शिव व माता पार्वती जी की आराधना करके पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस व्रत के प्रभाव से उत्तम पुत्र की प्राप्ति भी होती है। इसके अलावा मान्यता है कि इस दिन जो स्त्रियां श्रद्धा पूर्वक ये उपवास पूर्ण करती हैं, उन्हें धैर्य, सम्मान, प्रेम और शक्ति की प्राप्ति होती है।

हरियाली तीज, 19 अगस्त, शनिवार (श्रावण, शुक्ल पक्ष तृतीया )

तृतीया प्रारंभ- 18 अगस्त, 08:01 PM • तृतीया समाप्त- 19 अगस्त, 10:19 PM

3.हरियाली तीज के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त – 04:05 AM से 04:49 AM तक

प्रातः सन्ध्या – 04:27 AM से 05:33 AM

अभिजित मुहूर्त – 11:36 AM से 12:27 PM तक

विजय मुहूर्त- 02:11 PM से 03:03 PM तक

गोधूलि मुहूर्त – 06:30 PM से 06:52 PM तक

सायाह्न सन्ध्या- 06:30 PM से 07:36 PM तक

अमृत काल 05:44 PM से 07:32 PM तक

4.विशेष योग

रवि योग- 19 अगस्त 01:47 AM से 20 अगस्त से 05:33 AM

5.हरियाली तीज से जुड़ी पौराणिक मान्यता

हरियाली तीज का पर्व शिव-पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इस कड़ी तपस्या के फल स्वरूप 108वें जन्म के बाद श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान भोलेनाथ ने पार्वती जी को पत्नी के रूप में स्वीकार किया। ऐसी मान्यता है कि तभी भगवान शिव और माता पार्वती ने इस दिन को सुहागिन स्त्रियों के लिए सौभाग्य का दिन होने का वरदान दिया।

तो भक्तों, ये थी हरियाली तीज के शुभ मुहूर्त और पौराणिक मान्यता से जुड़ी जानकारी । हमारी कामना है कि आपको इस व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त हो, और आप पर भगवान शिव व माता पार्वती की कृपा सदैव बनी रहे। ऐसी ही धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए ‘श्री मंदिर’ के इस धार्मिक मंच पर ।

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Akha Teej,

 

6.साल 2023 में हरियाली तीज किस तारीख | Timing kya hai

2023 साल 2023 में हरियाली तीज 19 अगस्त, शनिवार को है। तृतीया तिथि शुरू होगी। 18 अगस्त रात्रि 8:01 पर तृतीया तिथि समाप्त हो गई। 19 अगस्त रात्रि 10:19 पर सुबह पूजा पर होगा। 7:47 से सुबह 9:22 तक दोपहर पूजा का शुभ होगा। 12:32 से दोपहर 2:07 तक शाम की पूजा पर शुभ हो रहा है तो होगा 6:52 से रात 7:15 तक रात की पूजा का शुभ मुहूर्त होगा। 12:10 से 12:55 पर

हरियाली तीज 2023 2023 में हरियाली तीज के दिन सिद्धि योग बनेगा, जो कि बहुत ही शुभ होता है। मान्यता है कि सिद्धि योग में किए गए कार्य सिद्ध होते हैं। हरियाली तीज वाले दिन सुबह 10:26 से सिद्धि योग प्रारम्भ हो रहा है और यह योग रात्रि तक रहेगा। इस योग में पूजा पाठ करना बेहद ही फलदायी होगा। हरियाली तीज पूजा विधि हरियाली तीज व्रत के दिन सुबह स्नानादि के बाद 16 श्रृंगार करें। संभव हो तो हरा रंग धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर एक साफ चौकी पर

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7.पूजा विधि नियम | puja vidhi Rule

हिमांशी व माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित पर दूध दीप जलाये और सभी पूजन सामग्री अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पण करें। इसके बाद तीज व्रत कथा परे है। सुने अंत में आरती कर अखंड सौभाग्य के लिए प्रार्थना करें। हरियाली तीज व्रत के नियम हरियाली तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। इस दिन माता पार्वती को सुहाग की सामग्री में सिंदूर जरूर चढ़ाना चाहिए। इस दिन शिव परिवार को पंचामृत से स्नान कराएं और भोग के रूप में खीर अर्पित कर रही हूँ। तीज व्रत निर्जला होता है इसलिए यदि आप

यानी तीज का व्रत है तो की शुरुआत से लेकर पर्यटन जल ग्रहण नहीं करना चाहेये हरियाली तीज में हरे रंग का विशेष महत्त्व है। ऐसे में मैं हरे रंग की चूड़ी, बिंदी, हरी साड़ी और अन्य श्रृंगार सामग्री का इस्तेमाल करें।

Teej 2023 kab hai

साल 2023 में सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अगस्त को होने के कारण हरियाली तीज का त्योहार 19 अगस्त को मनाया जाएगा

हरियाली तीज पूजा विधि

(Hariyali Teej Vidhi):

1.हरियाली तीज व्रत के दिन सबसे पहले सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जग कर स्नान करें और हरे रंग के वस्त्र धारण करें.

  1. इसके बाद पूजा घर को अच्छे से साफ-सुथरा कर लें. 3. पूजा घर में चौकी रखें और इस पर लाल रंग का वस्त्र बिछा

  2. वस्त्र बिछाने के बाद माता पार्वती, भगवान शि और गणेश की मिट्टी की मुर्ति बनाकर स्थापित कम्हें like

  3. चौकी के दाहिनी तरफ घी के दीपक जलाएं

6.माता पार्वती, भगवान शिव और गणेश की मूर्ति पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं.

  1. इसके बाद भगवान शिव को धतूरा, चंदन और सफेद रंग के फूल और माता पार्वती को श्रृंगार की समाग्री अर्पित करें.

  2. इसके बाद भगवान भोलेनाथ और देवी पार्वती को भोग अर्पित kare.

रियाली तीज व्रत कथा पढ़े

9.Hariyali Teej Ki Pooja Kaise Kareni, Hariyaliraj Pooja समापन Vidhi ,

Teej ki Puja kaise karen | परफेक्ट हरियाली तीज पूजा के रहस्य खोलें: परिणाम की गारंटी!”

नमस्कार, आज हम जिसे व्रत की पूजा विधि के बारे में आपको बताने जा रहे हैं उसके बारे में ऐसी मान्यता है की उस व्रत को करने से आपको मनोवांछित वर की प्राप्ति होती है। हम बात कर रहे हैं हरियाली तीज की पूजा विधि की। तो चलिए इसके बारे में विस्तारपूर्वक जानते हैं। हरियाली तीज के दिन सुबह उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर हरे रंग के वस्त्र धारण कर ली और 16 श्रृंगार करके तैयार हो जाए। अगर संभव हो पाए तो आप हर एक चूड़ियां पहने गे और हाथों में मेहंदी लगाएं।

कई स्थानों पर तेज की पूजा प्रदोष काल यानी दिन और रात्रि के मिलन किस समय में होती है, वहीं कुछ स्थानों पर सुबह के समय इस पूजा को किया जाता है। पूजा के लिए आप काली बालू या काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बना लें। इसके बाद आप पूजा इस स्थल पर एक रंगोली बनाएं या हल्दी से उस स्थान हो लीव इसके ऊपर आप एक आसान रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछा दें।

आप एक नई थाली में केले के पत्ते बिछाए और उस पर प्रतिमाओं को रख दी। अब आप इन प्रतिमाओं को आसन पर स्थापित करें। प्रतिमाओं के साथ आप कलश की भी स्थापना कर सकते हैं। कलश की स्थापना के बाद आप शिवलिंग को पंचामृत या जल से अभिषेक करें। अब आप भगवान शिव और भगवान गणेश को अष्टगंध का तिलक लगाएं और माता पार्वती को कुमकुम का तिलक लगाए इसके बादआप सभी प्रतिमाओं को पुष्पमाला पहनाएं।

इसके पश्चात आप भगवान गणेश को दूर्वा, धूप, दीप, अक्षत, जनयु, पुष्प, फल, वस्त्र आदि अर्पित कर ली। अब आप भगवान शिव को दूर्बा, बिल्वपत्र, धतूरा, अक्षत, वस्त्र, जनयु, धूप, दीप आदि चढ़ाएं। माता पार्वती को आप पूजा सामग्री के 716 श्रृंगार की वस्तुएं अवश्य अर्पित करें।

इसके अलावा आम भगवान को मेवा।मिठाई, फल, पकवान और खीर का भोग अवश्य लगाएं। इस दिन हरियाली तीज की व्रत कथा सुनने का भी विशेष महत्त्व है इसलिए इस कथा का श्रवण जरूर करें। अंत में भगवान की आरती उतारें और फूल चूक के लिए क्षमायाचना करें। इस दिन रात्रि में भजन कीर्तन करें और अगले दिन नहाने और पूजा करने के बाद ही भगवान को चढ़ाए गए भोग से व्रत का पा रहे हैं। करें तो यह थी हरियाली तीज की संपूर्ण पूजा विधि। अगर आप इस दिन के महत्त्व को विस्तार से जानना चाहते हैं तो happywishesimages.comपर अवश्य जाएं। नमस्कार।

 

तीज व्रत की कथा पढ़ना |

10.Hariyali Teej व्रत(vrat) katha

4.Hariyali Teej व्रत(vrat) katha

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है apki apni website happywishesimages.com  में दोस्तों भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सुहागन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस साल हरतालिका तीज का त्यौहार 19 august 2023 को मनाया जाएगा। सबसे पहले इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था।

तो सुनती है हरतालिका तीज की व्रत कथा दो स् तो हरियाली तीज व्रत कथा के अनुसार शिवजी ने माता पार्वती को इस व्रत के बारे में विस्तार पूर्वक समझाया था। माँ गौरा ने माता पार्वती के रूप में हिमालय के घर जन्म लिया था। बचपन से ही माता पार्वती भगवान शिव को वर के रूप में पाना चाहती थी और उसके लिए उन्होंने कठोर तप किया।

12 सालों तक निराहार रहकर उन्होंने कठोर तप किया। ये सब देखकर उनके पिता बहुत दुखी थे। 1 दिन नारदजी ने उनके पिता से आकर कहा की पार्वती के कठोर तब से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु आपकी पुत्री से विवाह करना चाहते हैं। नारदमुनि की बात सुनकर महाराज हिमालय बहुत प्रसन्न हुए। उधर भगवान विष्णु के सामने जाकर नारदमुनि बोले।

महाराज हिमालय अपनी पुत्री पार्वती का विवाह आपसे करवाना चाहते हैं। भगवान विष्णु ने भी इसकी अनुमति दे दी। फिर माता पार्वती के पास जाकर नारदजी ने इसकी सूचना दी की आपके पिता ने आप का विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया है। यह सुनकर माता पार्वती बहुत निराश हुईं। उन्होंने अपनी सखी को बताया कि वो भगवान शिव को पाने के लिए ये व्रत कर रही है।

माता पार्वती की इच्छा अनुसार उनके पिता महाराज हिमालय की नजरों से बचाकर उनकी सखियां माता पार्वती को घने सुनसान जंगल में स्थित एक गुफा में छोड़ आईं। यहीं रहकर उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तब शुरू किया जिसके लिए उन्होंने रेत से एक शिवलिंग की स्थापना की। संयोग से हस्त नक्षत्र में भाद्रपद शुक्ल तृतीया का।

ये दिन था जब माता पार्वती ने शिवलिंग की स्थापना की थी। इस दिन निर्जला उपवास रखते हुए उन्होंने रात्रि में जागरण भी किया था। उनके कठोर तब से भगवान शिव प्रसन्न हुए और माता पार्वती को उनकी मनोकामना पूर्ण होने का वरदान दिया। अगले दिन अपनी सखी के साथ माता पार्वती ने व्रत का पारण किया और समस्त पूजा सामग्री को गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया।

उधर माता पार्वती के पिता भगवान विष्णु को अपनी बेटी से विवाह करने का वचन दिए जाने के बाद पुत्री के घर छोड़ देने से व्याकुल थे। वह माता पार्वती को ढूंढ़ते हुए उस स्थान तक जा पहुंचे जहाँ माता पार्वती थी। इसके बाद माता पार्वती ने उन्हें अपना घर छोड़ देने का कारण बताया और भगवान शिव से विवाह करने का अपना संकल्प और भगवान शिव द्वारा मिले वरदान के बारे में भी बताया।

इसके बाद माता पार्वती के पिता हिमालय ने भगवान विष्णु से माफी मांगी और वे भगवान शिव के साथ माता पार्वती के विवाह के लिए राजी हो गए। कुछ समय बाद उन्होंने माता पार्वती का विवाह भगवान शिव के साथ पूरे विधि विधान पूर्वक करवा दिया। मान्यता है कि इस दिन जो महिलाएं विधि विधानपूर्वक और पूर्ण निष्ठा से इस व्रत को करती हैं वे मनचाहे वर को प्राप्त करती है।

साथ ही यह पर्व दांपत्य जीवन में खुशी बरकरार रखने के उद्देश्य से भी मनाया जाता है।

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FAQ

हरियाली तीज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन विवाहित स्त्रियाँ निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं, पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस व्रत से उत्तम पुत्र की प्राप्ति भी होती है। यह दिन स्त्रियों को धैर्य, सम्मान, प्रेम और शक्ति प्राप्त होती है।
हरियाली तीज 19 अगस्त को मनाई जाती है, जो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया होती है।
ब्रह्म मुहूर्त: 04:05 AM से 04:49 AM तक प्रातः सन्ध्या: 04:27 AM से 05:33 AM तक अभिजित मुहूर्त: 11:36 AM से 12:27 PM तक विजय मुहूर्त: 02:11 PM से 03:03 PM तक गोधूलि मुहूर्त: 06:30 PM से 06:52 PM तक सायाह्न सन्ध्या: 06:30 PM से 07:36 PM तक अमृत काल: 05:44 PM से 07:32 PM तक
रवि योग: 19 अगस्त 01:47 AM से 20 अगस्त 05:33 AM तक
पौराणिक मान्यता के अनुसार, हरियाली तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस पर्व के दिन भगवान शिव ने पार्वती जी को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था, जिससे यह दिन सुहागिन स्त्रियों के लिए सौभाग्य का दिन होने का वरदान है।
हमारी सलाह है कि आप विशेष तौर पर हरियाली तीज के दिन श्राद्धा और आदर से व्रत पालन करें, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें, और इस महत्वपूर्ण पर्व के माध्यम से उनकी कृपा प्राप्त करें।
हरियाली तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की कथा के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन पार्वती ने कठिन तप करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया और उन्होंने सुहागिन स्त्रियों के लिए सौभाग्यपूर्ण दिन का आशीर्वाद दिया।
हरियाली तीज के दिन आपको विशेष ध्यान देना चाहिए कि आप शुद्धता, भक्ति, और श्रद्धा से पर्व की तैयारी करें। व्रत विधि, पूजा-अर्चना, और पार्वती और शिव के प्रति आदर जैसे आदर्शों का पालन करें।

 

 

 

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